स्थान : रिचर्ड्स खाड़ी
क्षमता : 135,000 टन प्रति वर्ष
फोकस : फेरो क्रोम प्लांट
टाटा स्टील द्वारा दक्षिण अफ्रीका में फेरो क्रोम प्लांट की स्थापना
क्रोम में टाटा स्टील की रुचि 1949 में जगी। टाटा स्टील के भूवैज्ञानिकों की टीम ने उड़ीसा की सुकिन्दा घाटी में क्रोमाइट अयस्क (ओर) का पता लगाया। अगले 50 वर्षों में, टाटा स्टील भारत में, क्रोम व्यवसाय की मूल्यवर्द्धन श्रृंखला (वैल्यू चेन) - क्रोमाइट के खनन, उसके परिष्कार एवं फेरो क्रोम के निर्माण से लेकर, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय, दोनों बाज़ारों में क्रोम अयस्क, कन्सेंट्रेट एवं फेरो क्रोम की मार्केटिंग के सभी पहलुओं में सबसे बड़ी कंपनी के तौर पर उभरी। टाटा स्टील, मिनेरल एवं मेटल को बढ़त प्रदान करने वाले क्षेत्र के रूप में देखती है और इस व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की इच्छा रखती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, दक्षिण अफ्रीका की रिचर्ड्स खाड़ी में वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए हाई कार्बन फेरो क्रोम के उत्पादन हेतु एक प्लांट का प्रस्ताव दिया गया है।
फेरो क्रोम के उत्पादन के लिए दक्षिण अफ्रीका आदर्श स्थान है, मुख्य रूप से दो कारणों से - सस्ती बिजली और मज़बूत टेक्निकल / मार्केटिंग प्रभाव। दक्षिण अफ्रीका वैश्विक स्तर पर फेरो क्रोम का सबसे बड़ा उत्पादक है और विश्व की कुल ज़रूरत का 55 प्रतिशत से भी अधिक पूरा करता है। रिचर्ड्स खाड़ी, दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा और सबसे सक्षम बंदरगाह है। प्लांट हेतु दक्षिण अफ्रीका में रिचर्ड्स खाड़ी के चयन के कारणों में बिजली की प्रतियोगी क़ीमत, सक्षम एवं विकसित बंदरगाह सुविधा, प्रौद्योगिकी एवं उपकरणों का विकसित आधार तथा विकसित आधारभूत सुविधाओं का होना प्रमुख रहा। प्लांट के बिज़नेस मॉडल में भारत एवं अन्य स्थानों से उच्च स्तरीय क्रोम अयस्क लेना, रिचर्ड्स खाड़ी में उसे फेरो क्रोम में बदलना और फिनिश्ड उत्पाद को विभिन्न ग्राहक केन्द्रों को निर्यात करना शामिल है। रिचर्ड्स खाड़ी में सागर तट स्थित प्लांट की स्थापना से टाटा स्टील को व्यर्थ के भूमि-परिवहन ख़र्च का वहन नहीं करना पड़ेगा, जिससे इसकी प्रतियोगी क्षमता काफी बढ़ जायेगी।
रिचर्ड्स खाड़ी,दक्षिण अफ्रीका का सबसे महत्त्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्र है। यहाँ अभी दो अल्युमिनियम स्मेल्टर, हेवी मिनेरल्स प्लांट, खाद (फर्टिलाइज़र्स) प्लांट आदि तथा कुछ बड़े प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। रिचर्ड्स खाड़ी में सहयोगी सेवाओं एवं प्रशिक्षित कामगारों की उपलब्धता की स्थिति भी काफी अच्छी है। इन सभी बातों पर ध्यान देते हुए ही प्रस्तावित परियोजना हेतु रिचर्ड्स खाड़ी का चयन किया गया है।
दक्षिण अफ्रीका में प्रस्तावित प्लांट +64 प्रतिशत की क्रोम मात्रा वाले हाई कार्बन फेरो क्रोम का निर्माण करेगी और प्रथम चरण में इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 135,00 मेट्रिक टन होगी। प्लांट की निर्माण अवधि, इसके शिलान्यास के दिन से 17 महीने तक होगी।
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